पाकिस्तान में होगा तख्तापलट, आसिफ अली जरदारी की जाएगी कुर्सी? फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पहली ब

पाकिस्तान में होगा तख्तापलट, आसिफ अली जरदारी की जाएगी कुर्सी? फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पहली ब


पाकिस्तान के फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर तख्तापलट कर सकते हैं, ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आई थीं, जिनमें ये दावा किया गया था कि आसिफ अली जरदारी को हटाकर आसिम मुनीर राष्ट्रपति बनने की तैयारी कर रहे हैं. इस दावे को लेकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले ही अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं, लेकिन पहली बार इसको लेकर आसिम मुनीर ने चुप्पी तोड़ी है.

पाकिस्तान के एक अखबार में छपे एक कॉलम में स्तंभकार सुहैल वराइच ने खुलासा किया कि हाल ही में ब्रुसेल्स में उनकी मुलाकात असीम मुनीर से हुई थी. उन्होंने लिखा, ‘मुनीर ने साफ कहा कि नेतृत्व में किसी भी तरह के बदलाव की अफवाहें पूरी तरह झूठी हैं. इसके पीछे वही तत्व हैं जो सरकार और प्रतिष्ठान, दोनों का विरोध करते हैं और देश में राजनीतिक अराजकता फैलाना चाहते हैं. मुनीर ने यह भी जोड़ा कि उन्हें देश का रक्षक होने पर गर्व है और उनकी किसी और राजनीतिक पद में रुचि नहीं है.’

मुनीर ने इमरान खान की ओर किया इशारा?

वराइच के मुताबिक, जब मुनीर से राजनीतिक सुलह पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राजनीतिक मेल-मिलाप तभी संभव है जब ईमानदारी से माफ़ी मांगी जाए. हालांकि नाम स्पष्ट नहीं किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और उसके जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की ओर था. यह बयान पाकिस्तान की राजनीति में सेना की निर्णायक भूमिका और इमरान खान समर्थकों के साथ बढ़ते तनाव को दर्शाता है.

अमेरिका और चीन को लेकर क्या बोले आसिम मुनीर?

जनरल आसिम मुनीर ने विदेश संबंधों पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और चीन दोनों के साथ संतुलन बनाए रखेगा और किसी एक दोस्त की खातिर दूसरे का बलिदान नहीं करेगा. दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रयासों को वास्तविक बताया और यह दावा किया कि पाकिस्तान ने ही ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की पहल की थी.

पाकिस्तान में सेना और राजनीति

पाकिस्तान के इतिहास में सेना और राजनीति का गहरा जुड़ाव रहा है. कई बार सैन्य तख्तापलट के जरिए चुनी हुई सरकारें हटाई गईं. इस पृष्ठभूमि में आसिम मुनीर का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सरकार और सेना के बीच स्थिरता और संतुलन का संदेश देता है.

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