केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार ने तेलंगाना में पूर्ववर्ती बीआरएस सरकार पर फोन टैपिंग के गंभीर आरोप लगाते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया कि बीआरएस शासनकाल में 6,500 से अधिक फोनों की अवैध टैपिंग की गई, जिसमें उनका फोन, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, बीआरएस नेता टी. हरीश राव, के. कविता और यहां तक कि ग्रुप-1 पेपर लीक मामले की जांच कर रहे न्यायाधीश भी शामिल थे.
बंदी संजय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तल्ख अंदाज में कहा, ‘मेरा फोन हर पल टैप किया गया. रेवंत रेड्डी, हरीश राव और ग्रुप-1 पेपर लीक केस के न्यायाधीश भी निशाने पर रहे. केसीआर ने अपनी ही बेटी कविता और अन्य बीआरएस नेताओं के फोन टैप किए. यह घिनौना कृत्य है.’
इन लोगों के फोन हुए टैप
उन्होंने बीआरएस सरकार पर सत्ता का दुरुपयोग करने और स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो (एसआईबी) को बदनाम करने का आरोप लगाया. बंदी संजय ने कहा, ‘केसीआर ने एसआईबी को माफिया में बदल दिया. प्रभाकर राव और राधाकिशन राव जैसे भ्रष्ट अधिकारियों ने ठेकेदारों और नेताओं को ब्लैकमेल कर करोड़ों की उगाही की. माओवादी का बहाना बनाकर मेरे, रेवंत और हरीश राव के फोन टैप किए गए, लेकिन दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.’
उन्होंने खम्मम से कांग्रेस सांसद प्रत्याशी के पास से जब्त 7 करोड़ रुपये का मामला उठाते हुए सवाल किया, ‘वह पैसा कहाँ गया? ईडी को पत्र क्यों नहीं लिखा गया? केसीआर-प्रभाकर राव के उगाही रैकेट की तुरंत जांच हो.’ बंदी संजय ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर भी निशाना साधा, ‘रेवंत रेड्डी का फोन भी टैप हुआ, फिर वे SIT के सामने बयान क्यों नहीं दे रहे? केसीआर की भाषा दोहराकर वे मास्टरमाइंड्स को बचा रहे हैं.’
सीबीआई को सौंपा जाए मामला
उन्होंने बीआरएस और कांग्रेस पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा, ‘कांग्रेस-बीआरएस गठबंधन डायवर्जन पॉलिटिक्स कर रहा है. SIT के पास सबूत हैं कि जजों के फोन टैप किए गए, क्या SIT में हिम्मत है कि वह केसीआर, केटीआर और ‘ट्विटर टिल्लू’ संतोष को समन भेजे?’ उन्होंने मांग करते हुए कहा कि यह मामला सीबीआई को सौंपा जाए, यदि सीबीआई को जांच का अधिकार मिलता तो केसीआर और उनका बेटा अब तक जेल में होता.’
बंदी संजय ने कहा, ‘यह तेलंगाना की छवि को धूमिल करने वाला कांड है. केसीआर ने तेलंगाना की भावनाओं का दुरुपयोग कर नागरिकों के मौलिक अधिकार कुचले.’ उन्होंने रेवंत रेड्डी से तुरंत सीबीआई जांच के लिए केंद्र को पत्र लिखने की मांग की. यह मामला तेलंगाना की राजनीति में तूफान ला सकता है.
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