केंद्र सरकार ने शुक्रवार (8 अगस्त, 2025) को संसद के निचले सदन लोकसभा को बताया कि साल 2024 में दो लाख से अधिक भारतीय नागरिकों ने अपनी नागरिकता का त्याग कर दिया. विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने लोकसभा में पूछे एक प्रश्न के लिखित उत्तर में इस बात की जानकारी दी. कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार से पूछा था कि पिछले पांच सालों में कितने लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ी और अन्य देशों की नागरिकता को अपना लिया.
विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत की नागरिकता छोड़ने वाले लोगों की संख्या साल 2020 में 85,256, साल 2021 में 1,63,370, साल 2022 में 2,25,620, साल 2023 में 2,16,219 और साल 2024 में 2,06,378 रही.”
साल 2011 से 2014 तक कितने लोगों ने छोड़ी भारत की नागरिकता
उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे मामलों की संख्या साल 2011 में 1,22,819, साल 2012 में 1,20,923, साल 2013 में 1,31,405 और साल 2014 में 1,29,328 दर्ज किए गए थे. केंद्र सरकार ने कहा कि नागरिकता छोड़ने या विदेशी नागरिकता लेने के कारण व्यक्तिगत होते हैं और केवल संबंधित व्यक्ति को ही ज्ञात होते हैं.
सफल और समृद्ध प्रवासी भारतीय देश के लिए बहुमूल्य संपत्ति- विदेश राज्य मंत्री
विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा, ‘‘सरकार ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के इस दौर में वैश्विक कार्यस्थलों की संभावनाओं को पहचानती है. इसी के साथ, भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ अपने संबंधों में बदलावकारी सुधार भी लाए गए हैं.’’
उन्होंने कहा, “सफल, समृद्ध और प्रभावशाली प्रवासी भारतीय देश के लिए एक बहुमूल्य संपत्ति हैं और सरकार उनके नेटवर्क और सॉफ्ट पावर का उपयोग करके राष्ट्रीय हित में लाभ उठाने का प्रयास कर रही है.”
विदेश में रहने वाले कुल भारतीयों की संख्या कितनी?
वहीं, एक अन्य प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशों में रह रहे भारतीयों की कुल संख्या 3.43 करोड़ (कुल 3,43,56,193) है, जिनमें से 1,71,81,071 प्रवासी भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) और 1,71,75,122 अनिवासी भारतीय (NRI) हैं.
यह भी पढ़ेंः ‘हलफनामा दें या फिर देश से माफी मांगें’, राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग की दो टूक